विश्व जाल पत्रिका अनुरोध भारतीय भाषाओं के प्रतिष्ठापन के लिए समर्पित समस्त संस्थाओं को एकमंच पर लाने हेतु प्रयासरत है। इस विश्व-जाल पत्रिका का प्रकाशन एवं संपादन अवैतनिक अव्यावसायिक एवं मानसेवी होकर समस्त हिन्दी प्रेमियों को समर्पित है।

संपादक : दुर्गेश गुप्त "राज"

2 अक्टूबर, 2018

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सम्पादकीय

हिंदी-दिवस आया और चला गया

हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी हिंदी-दिवस आया और चला गया। सरकारी विभागों, उपक्रमों, मंत्रालयों की व्यस्तता कुछ बढ़ गई हिंदी के लिये। कहीं हिंदी माह, तो कहीं हिंदी सप्ताह, तो कहीं हिंदी-दिवस के रूप में इसे मनाया गया। राजभाषा के नाम पर हिंदी प्रतियोंगिताओं का आयोजन, नाटकों का मंचन, कवि-सम्मेलन, कवि-गोष्ठियां, हिंदीभाषी साहित्यकारों के सम्मान कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कुछ संस्थानों द्वारा उनके कार्यालयों में स्थान न होने के कारण शहर के मंहगे होटलों में गोष्ठियों का आयोजन किया गया। यानि कि कुछ मिलाकर यों कहिये कि राजभाषा के नाम जो निधि आबंटित हुई थी उसका उपयोग उनके द्वारा किया गया।

यदि गैर सरकारी या सरकारी मदद से चलने वाली साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं की बात करें, तो उनके द्वारा भी बड़ी ही धूमधाम से हिंदी-दिवस के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन, हिंदीसेवी संपादकों, पत्रकारों, साहित्यकारों के सम्मान जैसे कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। हिंदीसेवियों के सम्मान के लेकर जब देश की जानी-मानी संस्था के प्रमुख से मैंने कहा कि अपनी भाषा के लिये सम्मान की क्या आवश्यकता ? तो उनका कहना था कि हम तो वर्षों से इस प्रकार के आयोजन करते आ रहे हैं, अतः हम तो यह काम करेंगे। इस संबंध में पं.मदनमोहन मालवीय के 1918 में महात्मागांधी को लिखे पत्र के अंश याद आ रहे हैं जिसे महात्मा गांधी जी द्वारा ‘‘हिन्दी साहित्य सम्मेलन, इन्दौर’’ के अपने ‘अध्यक्षीय भाषण’ के दौरान 28 मार्च, 1918 को पढ़ा था, उसमें मालवीय जी द्वारा ऐसे सम्मेलनों के तारतम्य में लिखा था-"भाषा माता के समान है। माता पर हमारा जो प्रेम होना चाहिये वह हम लोगों में नहीं है। वास्तव में मुझे तो ऐसे सम्मेलनों से प्रेम नहीं है। तीन दिन का जलसा होगा। तीन दिन कह सुनकर (आगे) जो करना चाहिये उसे हम भूल जायेंगे। ..." आज भी 100 वर्ष उपरांत भी स्थिति जस की तस है।

आजादी के 71 वर्षों बाद भी हिंदी के प्रचार-प्रसार के नाम पर करोड़ों रुपये का अपव्यय किया जाना क्या समझदारी कही जायेगी। विशेषकर हिंदीभाषी राज्यों में जहां की राजकाज की भाषा हिंदी है, जहां रहने वाले हिंदी को दैनिक व्यवहार में उपयोग करते हों। कम से कम हिंदीभाषी राज्यों में तो इस प्रकार के आयोजन बंद होने ही चाहिये। इन राज्यों में संसदीय राजभाषा समिति की सिफारिशों को कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिये जाने चाहिये।

इस संबंध में नई दुनिया के प्रधान संपादक श्री आलोक मेहता की हिंदी दिवस के अवसर पर प्रकाशित ‘विशेष टिप्पणी’ ‘हिंदी दिवस के विरुद्ध’ से सहमत होते हुये उस आलेख का प्रकाशन इस अंक में कर रहा हूँ। मेहता जी का कहना है कि ‘‘मैं हिंदी दिवस मनाने के बिलकुल विरुद्ध हूं।----

पूरी संपादकीय पढें।

यह भी देखें :

  • लो फिर आ रहा है ‘‘हिन्दी-दिवस’’
  • मुख्य समाचार

    हिन्दी दिवस पर पीएम मोदी ने दी बधाई, कहा- संस्कार भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने का माध्यम है भाषा

    हिन्दी दिवस के उपलक्ष्य में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री राजनाथ सिंह समेत कई राजनीतिक हस्तियों ने शुभकामनाएं दी। इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट कर कहा कि भाषा वह माध्यम है जिससे कोई भी समाज अपना ज्ञान,संस्कृति और संस्कार भावी पीढ़ियों तक पहुंचाता है। उन्होंने आगे कहा कि हिंदी दिवस के अवसर पर हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार में लगे भाषाविदों और हिंदी प्रेमियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं।

    नरेन्द्र मोदी
    @narendramodi
    भाषा वह माध्यम है जिससे कोई भी समाज अपना ज्ञान,संस्कृति और संस्कार भावी पीढ़ियों तक पहुंचाता है। हिंदी दिवस के अवसर पर हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार में लगे भाषाविदों और हिंदी प्रेमियों को हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं। 2:02 PM - Sep 14, 2018

    जबकि, इस मौके पर गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भाषा देश की सांस्कृतिक धरोहर के साथ राष्ट्रीय स्वाभिमान की भी अभिव्यक्ति होती है। गृह मंत्री ने कहा कि हिंदी दिवस पर हम हिंदी समेत सभी भारतीय भाषाओं के प्रचार-प्रसार के लिए अपना योगदान देने का संकल्प करें।

    राजनाथ सिंह
    @rajnathsingh
    हिंदी दिवस पर हिंदी प्रेमियों एवं हिंदी सेवियों को हार्दिक शुभकामनायें। भाषा देश की सांस्कृतिक धरोहर के साथ राष्ट्रीय स्वाभिमान की भी अभिव्यक्ति होती है। हिंदी दिवस पर हम हिंदी समेत सभी भारतीय भाषाओं के प्रचार-प्रसार के लिए अपना योगदान देने का संकल्प करें। इससे भारत मज़बूत होगा। 8:23 AM - Sep 14, 2018 (livehindustan.com से साभार)

    हिंदी में ट्वीट ज्यादा पसंद

    अमरीका की मिशिगन यूनिवर्सिटी में हुए शोध में कहा गया है कि भारत में हिंदी में ट्वीट करने से ज्यादा प्रसिद्धि मिलती है। रिसर्च के अनुसार पिछले कुछ दिनों में सबसे अधिक पॉपुलर 15 ट्वीट में से 11 ट्वीट हिंदी में थे। इस रिसर्च टीम में भारतीय प्रोफेसर जॉयोजीत पॉल भी शामिल थे। (पत्रिका भोपाल से साभार)

    हिन्दी दिवस विशेष

    अंग्रेजी की दासता से आजादी चाहते हैं तो उठाएं ये पांच कदम

    दुनियाभर में करीब 50 करोड़ लोग हिंदी बोलते और समझते हैं। आप भी चाहें तो हिंदी को अपनी रोजमर्रा के कामकाज में स्थान दे सकते हैं। आज तकनीक ने हमें ऐसी सुविधाएं और विकल्प प्रदान कर दिए हैं जिनके माध्यम से हम हिंदी की बोर्ड का ज्ञान न होने पर भी हिंदी में टाइपिंग कर सकते हैं। कई कंपनियां फोन में ही हिंदी लैटिन की बोर्ड की सुविधा देती हैं। इससे हम अंग्रेजी में टाइप करके हिंदी शब्द लिख सकते हैं। इसके लिए गूगल प्लेस्टोर पर जाएं और वहां सर्च बार में हिंदी कीबोर्ड खोजें। इसके बाद परिणामस्वरूप ढेरों एप आ जाएंगे, जिनसे हिंदी टाइपिंग करना संभव है।

    दिन की शुरुआत सुप्रभात के साथ
    व्हाट्सएप पर अंग्रेजी में गुड मॉर्निंग लिखकर संदेश भेजने वाले लोग अपने संदेश को हिंदी में टाइप कर सकते हैं और सुप्रभात लिखकर दोस्तों और परिजनों को भेज सकते हैं।

    कैसे करें
    फोन की सेटिंग्स में ‘इनपुट एंड लैग्वेंज’ के अंदर हिंदी का विकल्प मिलेगा, उसको क्लिक कर दें। अलग-अलग फोन हैंडसेट में सेटिंग्स के विकल्प अलग-अलग हो सकते हैं।

    हिंदी में खोजें पसंदीदा रेस्टोरेंट और कारें खरीदारी
    शाम के वक्त अगर आप अच्छे खाने की तलाश में हैं तो हिंदी में सिर्फ खाने का नाम लिखना होगा उसके बाद उससे संबंधित रेस्टोरेंट और दुकानों की सूची आ जाएगी। साथ ही अब ऑनलाइन खरीदारी की सुविधा भी हिंदी में उपलब्ध हो गई है।

    कैसे करें
    क्रोम ब्राउजर के सर्च बार में ‘डोसा खाना है’ लिखें। इसके बाद आस-पास मौजूद डोसा बनाने वाले रेस्टोरेंट की सूची आ जाएगी। ध्यान रखें कि फोन का लोकेशन फीचर ऑन हो। उधर, अमेजन ने अपनी वेबसाइट हिंदी में भी शुरू कर दी है।

    हिंदी में भी मौजूद हैं कसरत के तौर-तरीके
    अगर आप सुबह के वक्त जिम जाने से बचने के लिए यूट्यूब पर फिटनेस वीडियो देखते हैं तो चलिए आपको बता दें अब आप हिंदी में पढ़कर भी कसरत की जानकारी जुटा सकते हैं। आपके लिए गूगल प्लेस्टोर पर ढेरों एप मौजूद हैं। इन्हें खोजकर आप अपनी सेहत का ख्याल रख सकते हैं।

    कैसे करें
    गूगल प्लेस्टोर पर Gym Guide in Hindi एक ऐसा ही एप है। इसमें 100से भी अधिक व्यायाम के बारे में बताया गया है। कसरत और उनके फायदे क्या हैं,उसके बारे में जानकारी दी गई है। आप अपनी जरूरत के मुताबिक व्यायाम का चयन कर सकते हैं।

    रास्ते में जाम की जानकारी हिंदी में
    आप कॉलेज या दफ्तर जाने से पहले ट्रैफिक का हाल जानने के लिए गूगल मैप्स का इस्तेमाल करते हैं तो अब इस काम में हिंदी आपकी मदद करेगी। हिंदी में लिखकर जगह खोज सकते हैं।

    कैसे करें
    इसके लिए फोन की सेटिंग में लैंग्वेज एंड इनपुट वाले विकल्प पर जाकर फोन की भाषा को हिंदी में तब्दील किया जा सकता है, उसके बाद गूगल मैप्स का परिणाम हिंदी भाषा में नजर आएगा।

    बिना सॉफ्टवेयर कंप्यूटर में पाएं हिंदी
    विंडोज में हिंदी कीबोर्ड ऑन करने के लिए आपको कंप्यूटर या लैपटॉप के ‘कंप्यूटर पैनल’ में Clock, Language, and Region में जाना होगा। इसके बाद Region and Language पर क्लिक कर दें। यहां ऊपर वाली पट्टी में चार नए बार (रेखाएं) दिखाई देंगे। पहले बार पर फॉर्मेट, दूसरे पर लोकेशन, तीसरे पर कीबोर्ड... और चौथे पर लैंग्वेंज एंड एडमिनिस्ट्रेटिव का विकल्प है। हिंदी कीबोर्ड पाने के लिए तीसरे नंबर के विकल्प ‘कीबोर्ड’ पर क्लिक करें। फिर चेंज कीबोर्ड पर क्लिक करें। एक और स्क्रीन बार खुलेगी, जिसमें ‘जनरल’ पर क्लिक करना होगा। यहां जाने के बाद हिंदी (इंडिया) के विकल्प पर जाएं। इसमें आपके ‘देवनागरी- इनक्रिप्ट’ और ‘हिंदी ट्रेडिशनल’ के बॉक्स दिखाई देंगे। किसी एक का चयन करें और ‘अप्लाई’ पर क्लिक करें। इससे कंप्यूटर में हिंदी कीबोर्ड का फीचर आ जाएगा। इसके लिए अलग फॉन्ट की जरूरत नहीं होगी। मंगल फॉन्ट माइक्रोसॉफ्ट की सभी विंडोज में डिफॉल्ट होता है।

    कीबोर्ड को अंग्रेजी से हिंदी में बदलना काफी आसान
    माइक्रोसॉफ्ट के इस इनबिल्ट कीबोर्ड का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसे बड़ी ही आसानी से हिंदी से अंग्रेजी और अंग्रेजी से हिंदी में बदला जा सकता है। इसके लिए Shift+Alt बटन को एक साथ दबाना होता है। उदाहरण के तौर पर अगर आप हिंदी टाइपिंग कर रहे हैं तो Shift+Alt को दबाकर कीबोर्ड को अंग्रेजी में बदल सकते हैं। वहीं अगर आप अंग्रेजी में टाइपिंग कर रहे हैं तो Shift+Alt को दबाने से हिंदी में टाइपिंग शुरू कर कर सकते हैं। यह शॉर्टकट ऑनस्क्रीन कीबोर्ड पर भी लागू होते हैं।(livehindustan.com से साभार)

    विधि आयोग के इंकार पर शुरू किया अभियान: हिंदी के लिए वकीलों का शंखनाद
    नई दिल्ली (एजेंसीं)। टेलीविजन के माध्यम से देश के अधिकतर घरों में हिन्दी के प्रवेश के बावजूद इसे उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय की भाषा नहीं बनाया जा सका है और विधि आयोग के इंकार के बावजूद इस भेदभाव के खिलाफ दिल्ली के वकीलों के एक समूह ने हिन्दी में बहस करने के विकल्प हेतु अभियान शुरू किया है ----पूरा समाचार पढ़ें।

    यह भी देखें :

  • बीबीए और एमबीए अब हिंदी में भी
  • सिब्बल ने कहा गणित और विज्ञान के समान हों पाठ्यक्रम: सभी स्कूलों में हिंदी पढ़ाई जाए
  • सपनों की राह में हिंदी की बाधा नहीं
  • बहुत फर्क है, ‘भारत’ और ‘इण्डिया’ में - अचला शर्मा, पूर्व प्रभारी, बीबीसी (हिन्दी)
  • गाँधी जी की 150वीं जयंती पर

    विशेष आलेख

    100 वर्ष बाद भी हम कहाँ हैं?

    (महात्मा गांधी जी द्वारा दिनांक 28 मार्च, 1918 को ‘हिन्दी साहित्य सम्मेलन, इन्दौर’ में पढ़ा ‘‘अध्यक्षीय भाषण’’)

    युवराज, सभापति, भाइयों और बहनों,
    हमारे पूज्यनीय और स्वार्थ-त्यागी नेता पंडित मदनमोहन मालवीय नहीं आ सके। मैंने उनसे प्रार्थना थी कि जहां तक बने सम्मेलन में उपस्थित रहियेगा। उन्होंने वचन दिया था कि वे जरूर आयेंगे। पंडित जी सम्मेलन में तो उपस्थित नहीं हुये, पर उन्होंने एक पत्र भेज दिया है। मैं उम्मीद करता था कि यदि पंडित जी नहीं आयेंगे तो उनका पत्र अवश्य आयेगा और उसे मैं आप लोगों के सामने उपस्थित कर सकूंगा। यह पत्र मुझे आज मिला है। मैंने स्वागतकारिणी सभा को हिन्दी के ----पूरा आलेख पढ़ें।

    गांधी जी के संपादन में प्रकाशित ‘‘हिन्दी नवजीवन’’ के प्रथम अंक दिनांक 19 अगस्त, 1921 की प्रति

    ‘‘हिंदी दिवस के विरुद्ध’’
    आलोक मेहता

    आपसे कोई सवाल पूछे-‘आप क्या साल में कुछ दिन अपनी माता या पिता का स्मरण करते हैं?’ दूसरा कोई पूछे-‘गांधी जी और उनके आदर्शों को 2 अक्टूबर के अलावा क्यों याद किया जाना चाहिए?’ साथ में खड़ा कोई तीसरा सवाल करे-‘अपने इष्ट देवी-देवता की एक दिन पूजा-अर्चना के बाद यदि साल भर आपके उपासना स्थल पर कोई गंदगी बरसाता रहे तो कैसा लगेगा?’ पता नहीं, मेरी तरह हमारे सुधी पाठकों को कभी गुस्सा आता है या नहीं। लेकिन कोई बहुराष्ट्रीय कंपनी राष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लाखों लोगों के बीच सर्वे करवाए तो निष्कर्ष यही निकलेगा कि तीनों सवालों के उत्तर देने वाले क्रोधित होने के साथ-साथ एक हद तक मारपीट के लिए तैयार हो जा----पूरा आलेख पढ़ें।

    पिछड़ेपन की भाषा बनने को अभिशप्त नहीं हिंदी
    बालेन्दु शर्मा दाधीच

    हिंदी की यात्रा सफलता और नाकामी के कई विरोधाभासी अर्धविरामों एवं अल्पविरामों से आगे बढ़ती हुई अपनी मौजूदा स्थिति तक आ पहुंची है। यात्रा अभी जारी है और मंजिल अभी दूर। एक क्षेत्र में कुछ कदम आगे बढ़ना और दूसरे में कुछ कदम पीछे हट जाना ही पिछले छह दशकों में हिंदी की विकास यात्रा का फलित है। कुछ विद्वानों ने हाल के वर्षों में अंग्रेजी के सांस्कृंतिक-सामाजिक प्रभुत्व को लेकर गंभीर चिंता प्रकट की हैं। उनकी चिंता अनावश्यक नहीं है। उसे लेकर सतर्क होने की जरूरत है। लेकिन यह मानने का कोई बड़ा कारण नजर नहीं आता कि आने वाले पच्चीस या पचास साल में हिंदी दूसरे दर्जे ----पूरा आलेख पढ़ें।

    यह भी देखें :

  • हिंदी में अदालती कार्यवाही के सफल प्रयोग
  • ‘‘भारतीय विधि आयोग’’ द्वारा उच्चतम न्यायालय में अंग्रेजी बनाये रखने की सिफारिश की
  • अदालती कामकाज में पूरी तरह सक्षम है हिंदी भाषा
  • हिन्दी के औजार

    इंटरनेट पर हिन्दी के संसाधन और औजार-टूल्स<>अनुनाद व नारायण प्रसाद रचित फ़ॉन्ट परिवर्तन डाउनलोड

    फ़ॉन्ट रूपांतर डाउनलोड<>हिन्दी में कम्प्यूटर पर कैसे लिखें<>हिन्दी भाषा सॉफ़्टवेयर डाउनलोड कड़ी

    हमारा उद्देश्य

    हमारा उद्देश्य राष्ट्रभाषा हिन्दी एवं भारतीय भाषाओं की रक्षा एवं देवनागनरी लिपि एवं अन्य भारतीय लिपियों की रक्षा करना है। जरा विचार करें जब भारतीय भाषाएं एवं लिपियां ही नहीं रहेंगी तो इन भाषाओं में लिखे गये साहित्य को कौन पढ़ेगा ? भाषाओं का सम्बन्ध सीधे संस्कृति से जुड़ा होने के कारण जब भाषाएं ही नहीं रहेंगी तो संस्कृति भी धीरे-धीरे विलुप्त हाती जाएगी। अत: भाषा एवं संस्कृति के संरक्षण में आप अपना योगदान किस प्रकार कर सकते हैं, कृपया ई-मेल द्वारा सूचित करें ताकि इनका प्रकाशन इस जाल-स्थल पर किया जा सके। इस जाल-स्थल को 2 अक्तूबर, 2018 को अद्यतन किया गया।
    E-mail : anurodh55@yahoo.com